छत्तीसगढ़
करोड़ों खर्च के बाद भी सड़कें खराब, गरियाबंद में निर्माण कार्यों पर उठे सवाल
Shantanu Roy
14 Aug 2026 11:37 PM IST

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छग
Gariaband. गरियाबंद। जिले के बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र में मंडी निधि से कराए गए सीसी सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 3 करोड़ 79 लाख 48 हजार रुपये की लागत से स्वीकृत 22 सीसी सड़कों में से कई सड़कों में निर्माण के कुछ महीनों बाद ही बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खराब गुणवत्ता के कारण सड़कें जल्द खराब हो रही हैं, जिससे सरकारी राशि की बर्बादी हो रही है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में बिंद्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में मंडी निधि से सीसी सड़क निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई थी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेका कंपनियों को अगस्त 2025 से कार्य आदेश जारी किए गए थे। इनमें कुछ सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि कई सड़कें अब तक अधूरी पड़ी हुई हैं।
धौराझोला मार्ग की सड़क में दो महीने में आई दरार
मूढ़गेल माल से धौराझोला जाने वाले मार्ग पर बनी 351 मीटर लंबी सीसी सड़क की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। इस सड़क का निर्माण मेसर्स आशीष यादव द्वारा करीब 10 लाख 61 हजार रुपये की लागत से किया गया था। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण के महज दो महीने बाद ही सड़क में जगह-जगह दरारें पड़ने लगीं। अब स्थिति यह है कि सड़क का उपयोग करने में लोगों को परेशानी हो रही है। इस मार्ग पर भारी वाहनों और निर्माण सामग्री की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत भी पक्की सड़क प्रस्तावित है, लेकिन मंडी बोर्ड द्वारा बनाई गई खराब सीसी सड़क मुख्य मार्ग की कनेक्टिविटी में बाधा बन रही है।
11 सड़कों में दरार, 5 निर्माण कार्य अधूरे
स्थानीय जानकारी के मुताबिक धौराझोला के अलावा खरीपथरा, तुहामेटा, आमदी, भरवामुड़ा समेत करीब 11 सड़कों में दरारें सामने आई हैं। वहीं छैलडोंगरी और गौहरापदर समेत 5 सड़कों का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई निर्माण कार्यों में सूचना बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। नियमानुसार निर्माण स्थल पर कार्य की लागत, एजेंसी और अन्य जरूरी जानकारी प्रदर्शित करना आवश्यक होता है, लेकिन कई जगह इसका पालन नहीं किया गया।
मॉनिटरिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
निर्माण कार्यों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि मंडी बोर्ड की तकनीकी शाखा इन कार्यों की मॉनिटरिंग रायपुर स्थित संभागीय कार्यालय से कर रही है। जानकारों के अनुसार सीसी सड़क निर्माण में मिट्टी की गुणवत्ता, बेस तैयार करने की प्रक्रिया और कॉम्पेक्शन का विशेष ध्यान रखना होता है। खासकर काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में मुरम की भराई, पानी की तराई और बेहतर दबाव प्रक्रिया जरूरी होती है। आरोप है कि कई जगह इन तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण सड़कें जल्दी खराब हो रही हैं।
जांच के बाद होगी कार्रवाई : मंडी बोर्ड
मंडी बोर्ड के एसडीओ कमल यादव ने कहा कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है, इसलिए उन्हें सभी कार्यों की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जल्द ही मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां भी गुणवत्ता संबंधी शिकायत मिलेगी, वहां आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिन ठेकेदारों ने काम पूरा नहीं किया है, उन्हें दोबारा नोटिस जारी किया जा रहा है। फिलहाल करोड़ों रुपये की लागत से बनी इन सड़कों की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि निर्माण में लापरवाही हुई है या तकनीकी कारणों से सड़कें खराब हुई हैं।
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